डीएनए टेस्ट विभिन्न व्यक्तियों के बीच परिवार के रिश्तों का सबूत प्रदान करता है। डीएनए टेस्ट से रक्त संबंध और एक ही परिवार से होने का पता चलता है। यदि कोई व्यक्ति रक्त संबंध के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति से जुड़ा है,और उनकी खून की जाँच में एक ही डीएनए युक्त नमूना मिलता है, तो यह दोनों के बीच संबंध होने का सबूत देता है।
उदाहरण के लिए, एक पिता का डीएनए हमेशा अपने बच्चों के डीएनए से मैच होता है। दो भाई बहनों में समानता दिखाने के लिए उनके डीएनए टेस्ट के माध्यम से उनके भाई बहन होने को निर्धारित करता है। एक दादा के डीएनए अपने पोते के डीएनए से मैच होता है।
भारत में डीएनए टेस्ट ज्यादातर एक पिता और उसके बच्चों के बीच relationship prove करने के लिए प्रयोग किया जाता है। कई मामलों में, अलग-अलग परिवार के सदस्यों के बीच विरासत, इमीग्रेशन या अन्य कानूनी प्रयोजनों को स्थापित करने के लिए आवश्यक होता है।
तकरीबन 1200 किस्म के डीएनए टेस्ट उपलब्ध है। लेकिन सामान्य आशय उस डीएनए टेस्ट से है, जिसमें पिता, माता, दादा, खानदान, वंश, परिवार या जातीय समूह का पता लगाया जाता है। इसका अर्थ है – आनुवांशिक सम्बन्धों का पता लगाना। इसका उद्देश्य उत्तराधिकार और संपाती के विवादों को या दूसरी तरह की भावनात्मक गुत्थियों को सुलझाना है। अब नवजात शिशुओं की डीएनए जांच भी होने लगी है। ताकि बच्चे के जींस के दोषों का पता लगाया जा सके। आपराधिक मामलों में भी डीएनए जांच होती है। डीएनए जांच के लिए व्यक्ति के खून, बाल, त्वचा और उल्ब तरल (एम्नियोटिक फ्लुइड) का सैंपल लिया जाता है। एम्नियोटिक फ्लुइड गर्भावस्था में भ्रूण के चारों ओर का तरल होता है। इसके अलावा व्यक्ति के गालों के अंदरूनी हिस्से से ब्रश या रुई के मार्फत नमूना भी लिया जाता है। मौथवॉश के मार्फत भी मुंह के अंदर के सेल जमा किये जा सकते हैं। इनकी जांच करने वाली मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएँ हैं, जो 10 हजार से 40 हजार तक की फीस लेती हैं और सामान्यता 15 दिनों में जांच रिपोर्ट देती है।