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Can a princess ever become a farmer? Find out for yourself.
किसान राजकुमारी
भील लोककथा
कंसारी
एक बड़े शक्तिशाली राजा की
बेटी थी।
वह राजकुमारी थी,
लेकिन बचपन से ही
किसान बनना चाहती थी।
इस बात से
उसके पिता बहुत नाराज़ रहते थे,
इसलिए जब कंसारी बड़ी हुई
तो उन्होंने
उसे महल से निकाल दिया
और ग़ुस्से से कहा,
महल से बाहर रह कर
तुम्हें पता चलेगा
कि जीवन कितना कठिन है।
तब तुम्हें होश आएगा!"
कंसारी ने
बचपन से संभाल कर रखे
बीजों की पोटली बांधी
और जंगल को चल दी।
जंगल में
उसने एक छोटी सी झोंपड़ी बनाई
और आसपास की ज़मीन पर
खेत बना कर बीज बो दिए।
खेती-बाड़ी
कड़ी मेहनत का काम था,
लेकिन कंसारी के तीन नए दोस्त—
बिल्ली, तोता और मकड़ी
उसकी मदद करते।
बिल्ली खेतों में
चूहों का शिकार करती।
मकड़ी झोंपड़ी की देखभाल करती।
तोता सारे राज्य में उड़ता रहता
और कंसारी को
नयी-नयी ख़बरें सुनाता।
वे सभी अच्छे दोस्त बन गये
और सब
मिल-जुल कर रहने लगे।
कुछ ही दिनों में
राजभर में
कंसारी के हरे-भरे खेतों की
चर्चा होने लगी।
कंसारी के खेतों की चर्चा से
राजा बहुत नाराज़ हुए
और देवताओं के राजा
इन्द्र देवता के पास पहुंचे।
उन्होंने इन्द्र देवता से कहा
कि कंसारी को सबक सिखाने में
मेरी मदद कीजिये।
इन्द्र देवता बोले,
यह मुझ पर छोड़ दो।
मैं धरती पर सूखा भेजूंगा।
कंसारी के खेत सूख जाएंगे,
फ़सल चौपट हो जाएगी।
तोते ने उनकी बात सुनी
और चुपचाप कंसारी को बता दी।
कंसारी
और उसके दोस्तों ने फ़सल
नदी के नम पेटे में लगा दी।
सूखा पड़ा,
राजभर की फ़सल सूख गई,
लेकिन कंसारी की फ़सल
लहलहाती रही।
यह देख कर
इन्द्र देवता ने सिर खुजाया
और बोले,
अब मैं धरती पर
बाढ़ भेजूंगा।
फ़सल बह जायेगी
तो कंसारी की अकल
ठिकाने आ जाएगी।"
तोते ने उनकी बात
कंसारी को बता दी।
अब की बार
कंसारी और उसके दोस्तों ने
फ़सल पहाड़ी की ढलान पर
लगा दी।
बाढ़ से
राजभर की फ़सल डूब गई
लेकिन कंसारी की फ़सल
लहलहाती रही,
क्योंकि बाढ़ का पानी
ढलान से नीचे की ओर
बह गया।
इन्द्र देवता ग़ुस्से से बोले,
अब की बार
मैं सैकड़ों चूहे भेजूंगा!
तोते ने उनकी बात
बिल्ली को बताई।
बिल्ली खुश होकर बोली,
भई वाह!
मैं अपनी सारी सखियों को
चूहों की दावत के लिए
बुला लेती हूं!
जल्दी ही बिल्लियों ने खेतों से
एक-एक चूहे का सफाया
कर दिया।
इन्द्र देवता दांत पीस कर बोले,
अब मैं चिड़ियां भेजूंगा!
चिड़ियों से वह अपनी फ़सल
नहीं बचा पायेगी!"
लेकिन इस बार
मकड़ी और उसकी
दोस्त-मकड़ियों ने
फ़सल पर
चिपचिपे जाले बुन दिए।
चिड़ियां फ़सल खाने आर्इं
तो चिपचिपे जालों में फंस गर्इं।
कंसारी की फ़सल फिर बच गई।
अब राजा की परेशानियां
बढ़ गयीं।
सूखे और बाढ़ से
राजा के राज की सारी फ़सलें
चौपट हो गर्इं।
लोग भूखों मरने लगे।
परेशान राजा मदद के लिए
इन्द्र देवता के पास पहुंचे।
इन्द्र देवता बोले,
तुम्हें मेरी मदद की
ज़रूरत नहीं।
तुम्हारी बेटी कंसारी
पहले ही लोगों को
अनाज दे रही है।"
हैरान राजा
और इन्द्र देवता
जंगल में पहुंचे
तो देखा कि कंसारी
और उसके दोस्त
लोगों को अनाज की बोरियां
दे रहे हैं।
राजा को अपनी मूर्खता पर
बहुत शर्म आई
और अपनी बेटी पर
बहुत गर्व हुआ।
इन्द्र देवता ने राजा से कहा,
अब तुम्हारी समझ में आया न
कि राजमहल में
रहने के अलावा भी
अच्छे काम होते हैं!"
राजा ने
अपनी बेटी से माफ़ी मांगी
और उससे महल में
लौट आने का अनुरोध किया।
कंसारी ने
अपने पिता को माफ़ कर दिया,
लेकिन वह महल में नहीं लौटी।
उसने अपने खेतों के पास
अपनी झोंपड़ी में
अपने दोस्तों के साथ
ख़ुशी-ख़ुशी रहना जारी रखा।
बाद में
वह किसान-राजकुमारी के नाम से
प्रसिद्ध हो गयी।
Illustration: Emanuele Scanziani
Music: Ladislav Brozman & Riccardo Carlotto
Translation: Madhu Bala Joshi
Narration: Vandana Maheshwari
Animation: BookBox
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